मुर्रा भैंस की पहचान और दूध बढ़ाने के 7 अचूक वैज्ञानिक उपाय
काला सोना कही जाने वाली मुर्रा भैंस के खान-पान, संतुलित पशुआहार, खनिज मिश्रण और दुग्ध वसा (Fat) बढ़ाने के व्यावहारिक वैज्ञानिक तरीके।
मुर्रा भैंस: भारत का काला सोना
हरियाणा और पंजाब की मुर्रा नस्ल दुनिया की सबसे अधिक दूध देने वाली भैंस मानी जाती है। शुद्ध नस्ल की मुर्रा भैंस 15 से 22 लीटर प्रतिदिन दूध देती है और इसके दूध में फैट 7% से 8.5% तक पाया जाता है।
मुर्रा भैंस की शुद्ध पहचान:
- सींग: सींग जलेबी के आकार के, बिल्कुल मुड़े हुए और छोटे होते हैं।
- रंग: गहरा काला (जेट ब्लैक) रंग।
- पूंछ: पूंछ के छोर पर सफेद बालों का गुच्छा (स्विच)।
दूध और फैट बढ़ाने के 7 अचूक उपाय:
- संतुलित दाना मिश्रण: प्रत्येक 2.5 लीटर दूध पर 1 किलो संतुलित दाना + शरीर रखरखाव के लिए 1.5 किलो दाना रोज़ाना दें।
- चिलेटेड मिनरल मिक्चर: रोज़ाना 50 ग्राम अच्छी कंपनी का खनिज मिश्रण चारे में मिलाकर दें। इससे पशु समय पर हीट में आता है और दूध में फैट बढ़ता है।
- हरा चारा व साइलेज: चारे में दलहनी (बरसीम, ल्यूसर्न) और गैर-दलहनी (मक्का, ज्वार) का मिश्रण 3:1 के अनुपात में रखें।
- पर्याप्त पानी: एक दुधारू भैंस को दिन में कम से कम 80-100 लीटर स्वच्छ और ताजा पानी पिलाएं।
- गर्मी में नहलाना: भैंस की त्वचा मोटी होती है, इसलिए दिन में दो बार नहलाने से दूध में गिरावट नहीं आती।
- बाईपास फैट: ज्यादा दूध देने वाली भैंसों को 50-100 ग्राम बाईपास फैट देने से फैट 1 से 1.5 अंक तक बढ़ता है।
- पेट के कीड़ों की दवा (Deworming): हर 3 महीने में पशु चिकित्सक की सलाह से कृमिनाशक दवा ज़रूर दें।
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